Hindu Nav Varsh Vikram Samvat कैसे हुआ विक्रम संवत का आरंभ?

विक्रम संवत जब प्रारंभ नहीं हुआ था तब युधिष्ठिर संवत, कलियुग संवत और सप्तर्षि संवत प्रचलित थे। सप्तर्षि संवत की शुरुआत 3076 ईसवी पूर्व हुई थी जबकि कलियुग संवत की शुरुआत 3102 ईसवी पूर्व हुई थी। इसी दौरान युधिष्ठिर संवत भी प्रारंभ हुआ था। सभी के संवत की शुरुआत चैत्र प्रतिप‍दा से ही होती थी| विक्रम संवत में वार, नक्षत्र और तिथियों का स्पष्‍टिकरण किया गया। इसमें पंचांग की बातों के साथ ही बृहस्पति वर्ष की गणना को भी शामिल किया गया।

हिंदू नववर्ष से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

1. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, विक्रम संवत के प्रथम दिन ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचाना की थी. प्रभु श्रीराम एवं धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी विक्रम संवत के प्रथम दिन हुआ था. हिंदू नववर्ष के प्रथम दिन से ही नया पंचाग शुरू होता है.

 

2. विक्रम संवत के एक माह के दो हिस्से हैं. पहला कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष. 15 दिनों का एक पक्ष होता है. कृष्ण पक्ष का 15 दिन अमावस्या और शुक्ल पक्ष का 15वां दिन पूर्णिमा होती है.

 

3. विक्रम संवत की प्रत्येक तिथि यानी दिन की गणना सूर्योदय को आधार मानकर किया जाता है. हिंदू कैलेंडर का हर दिन सूर्योदय से शुरु होता है और अगले सूर्योदय तक मान्य होता है.

 

4. एक विक्रम संवत में 12 माह होते हैं, 30 दिनों का एक माह होता है और सात दिनों का एक सप्ताह होता है. इस कैलेंडर में तिथि की गणना होती है. इसी विक्रम संवत कैलेंडर को आधार मानकर अन्य धर्म के लोगों ने अपने कैलेंडर बनाए.

 

5. विक्रम संवत कैलेंडर अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे है.

 

6. विक्रम संवत कैलेंडर का पहला माह चैत्र और 12वां यानी अंतिम माह फाल्गुन होता है. इस कैलेंडर के तिथियों की गणनाएं पंचांग के आधार पर होती हैं.